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बिहार सरकार की सबसे महत्वकांक्षी नल जल योजना (Nal Jal Yojana) का काम कागज पर तो शानदार है, लेकिन जमीन पर भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी है. पढ़िए समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल में चार साल से चल रही नल – जल योजना की ये ग्राउंड रिपोर्ट.

समस्तीपुर 17 दिसंबर’ 20 | दिव्यांशु राय
समस्तीपुर जिले में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत काफी दयनीय है। आधिकारिक तौर पर दी जा रही रिपोर्ट व जमीनी हकीकत में तालमेल नहीं दिख रहा है। विभागीय रिपोर्ट की मानें तो जिन वार्डों में काम को पूर्ण दर्शाए जाने की बात की गयी है, उन वार्डो में भी काम अधूरा पड़ा है।
विभागीय रपट के मुताबिक रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत कुल 215 वार्डों में से 200 वार्डों में काम को पूर्ण बताया गया है। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिसका खुलासा हाल ही में एसडीओ ब्रजेश कुमार के द्वारा की गयी जांच से उजागर हुआ है। जानकारी के अनुसार प्रखंड के 215 वार्डो में से 142 वार्डों में प्रखंड कार्यालय के माध्यम से कार्य को कराया जाना था। जबकि 73 वार्डों में पीएचईडी को काम करना था। प्रखंड कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 135 वार्डों में तथा पीएचईडी द्वारा 65 वार्डों में काम की पूर्णता बतायी जा रही है। जबकि हकीकत अधिकांश वार्डों में बोरिंग का कार्य ही पूरा हो पाया है। ना तो पाइप बिछाया गया है और ना ही घर तक पानी पहुंचाया गया है।
बताया गया है कि एसडीओ के द्वारा जब भरवाड़ी पंचायत में नल-जल योजना की जांच की गई तो 12 वार्डो में से केवल 04 वार्डो में ही योजना को पूर्ण पाया गया। जबकि 08 वार्डों में योजना अपूर्ण पायी गयी। हरिपुर पंचायत की स्थिति सबसे बदतर देखने को मिली। मात्र एक ही वार्ड में काम पूर्ण पाया गया। शेष वार्डो में अब तक कार्य अपूर्ण है। वार्ड नं 13 में तो टंकी ही क्षतिग्रस्त पाया गया। जहांगीरपुर दक्षिण पंचायत के वार्डो में केवल बोरिंग किया हुआ पाया गया। वहीं पाईप बिछाया ही नहीं गया है तो फिर लोगों के घर तक टोटी लगने का सवाल नहीं उठता है।

यही स्थिति प्रखंड के अन्य पंचायतों की भी है। कहीं बोरिंग हुआ है तो पाइप नहीं बिछा है। जहां पाइप बिछा है वहां घर तक पानी नहीं पहुंचा है। अभी तक किसी भी वार्ड में पम्प संचालन के लिए आपरेटर की समुचित व्यवस्था नहीं हो पायी है। किसी भी पंचायत में आपरेटर की विधिवत नियुक्ति नहीं हुई है। इसको लेकर भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। कहीं-कहीं तो यह स्थिति है कि ठीकेदारों के द्वारा निजी जमीन में बोरिंग और मीनार इस शर्त के साथ लगाया गया है कि उन्हें तीन हजार रुपये मासिक का भुगतान किया जाना है। इस मुद्दे को लेकर भी जमीन मालिक ऊहापोह में पड़े हुए हैं।
रोसड़ा एसडीओ ब्रजेश कुमार कहते हैं कि नल-जल योजना की जांच में कई पंचायत के वार्डों में काम अधूरा पाया गया है। इसके लिए बीडीओ को एक सप्ताह में अधूरे कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। जिन वार्डों में विशेष लापरवाही बरती जा रही है, उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।
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