समस्तीपुर में आईसीयू सुविधा से अछूते है सरकारी अस्पताल, आईसीयू के नाम पर निजी अस्पतालों में हो रही ठगी.

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समस्तीपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। लगभग 60 की आबादी वाले इस जिले में अब तक आईसीयू की सुविधा किसी भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। गंभीर बीमार लोगों को अस्पताल प्रशासन तत्काल रेफर कर देते है। इसके बाद परिजन मरीज को या तो हॉयर सेंटर लेकर चले जाते है अथवा जिला मुख्यालय स्थित प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराते है। जिसका नतीजा यह है कि निजी अस्पतालों में आईसीयू एवं पीआईसीयू सुविधा के नाम पर मरीज ठगे जा रहे हैं। अधिकतर अस्पतालों के एक कमरे में पर्दा लगाकर एसी, मॉनीटर, ऑक्सीजन पाइपलाइन एवं कुछ बेड दिखाकर मरीजों का दोहन किया जा रहा है।

आइसीयू और पीआईसीयू के नाम पर 3 हजार से 8 हजार रुपये प्रतिदिन वसूली की जाती है। उपर से प्रतिदिन दवाई, जांच, डॉक्टर का विजिट का खर्चा अलग से, जबकि न तो उन आइसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद होते हैं और न ही वेल ट्रेंड कर्मी ही। मरीजों का वहां भगवान भरोसे ही इलाज होता है।

मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर अपनी जान छुड़ा लेते हैं डॉक्टर : सबसे दुखद पहलू यह है कि आपात स्थिति में जब मरीजों की स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है, तो उन्हें पीएमसीएच एवं अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करके डॉक्टर अपनी जान छुड़ा लेते हैं। जानकारों की मानें तो शहर के कुछेक गिने चुने अस्पताल में ही डिग्रीधारी गंभीर और गहन चिकित्सा विशेषज्ञ चिकित्सक एवं ट्रेंड आईसीयू कर्मी मौजूद हैं, जो आईसीयू में गंभीर मरीजों का इलाज करने में सक्षम हैं।

सरकारी व्यवस्था का हाल : सरकारी व्यवस्था का हाल यह है कि सदर अस्पताल में 11 वर्ष पूर्व आईसीयू भवन तो बना दिया गया, लेकिन आज तक उसे चालू नहीं किया जा सका। इस आईसीयू को करीब 40 लाख से अधिक मूल्य के उपकरणों से सुसज्जित किया गया था। जिसमें 4 वेंटिलेटर भी शामिल थे। लेकिन काफी वर्षों तक उपयोग में नहीं आने पर वर्ष 2019 में 3 वेंटिलेटर को पीएमसीएच भेज दिया गया। भवन के आधे हिस्से को डायलिसिस यूनिट को दे दिया गया है। अब तो भवन भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : आईसीयू का अर्थ अस्पतालों के एक कमरे में पर्दा लगाकर एसी लगा देना, मॉनिटर लगा देना, ऑक्सीजन पाइपलाइन एवं बेड लगा देना नहीं होता है। बल्कि आईसीयू में उन सभी मशीनों को चलाने में दक्ष तथा गम्भीर मरीजों के इलाज में कुशल एवं विशेषज्ञ चिकित्सक की 24 घण्टे उपलब्धता तथा उसके नेतृत्व में देखरेख करने वाली एक कुशल टीम का होना भी अति आवश्यक है। अतः मरीज के परिजनों को किसी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराने से पहले उस आईसीयू के विशेषज्ञ चिकित्सक ( जो एमबीबीएस के उपरांत एनेस्थेसिया एवं क्रिटिकल केअर में एमडी होते हैं) उनकी एवं उनकी उपलब्धता की पूरी जानकारी का पता कर लेना चाहिए। तभी मरीज को भर्ती करना चाहिए।

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